
मत भूल ए -नारी कि
तू एक आग हैं
जलाकर ख़ाक कर दे पल में
तू वो आफ़ताब हैं
कौन कहता हैं तू बेबस हैं
तू लाचार हैं
चीरकर रख दे आज भी
तू लक्ष्मीबाई की वो तलवार है .
तू ही अन्नपूर्णा घर की
तू खुशियों का भंडार हैं
लाती हैं जो सुख समृधि
तू लक्ष्मी का वो अवतार हैं .
मत डर आगे बड़ निरंतर
तुझमे दुर्गा का वास हैं
जड़ हो जाये दुश्मन वही पे
तुझमे वो ललकार है
कर गौरव खुदपे नारी होने का
तुझसे ही तो ये संसार हैं .








