Friday, 21 December 2012

नारी ..तू एक आग है











मत भूल  ए -नारी  कि
                             तू एक आग हैं  
जलाकर ख़ाक कर दे पल में
                             तू वो आफ़ताब हैं 
 कौन कहता हैं तू बेबस हैं 
                             तू लाचार हैं 
चीरकर रख दे आज भी 
                             तू लक्ष्मीबाई की वो तलवार है .
तू ही अन्नपूर्णा  घर की 
                              तू खुशियों  का भंडार हैं
लाती हैं जो सुख समृधि 
                              तू लक्ष्मी का वो अवतार हैं .
मत डर आगे बड़ निरंतर
                              तुझमे दुर्गा का वास हैं 
जड़ हो जाये दुश्मन वही पे 
                              तुझमे  वो ललकार है 
कर गौरव खुदपे नारी होने का 
                              तुझसे ही तो ये संसार हैं .
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Wednesday, 19 December 2012

वहशी लोग




गंदी नाली के कीड़े है ये वहशी लोग
जो रात –दिन पनप रहे है किसी   
गटर के गंदे पानी में.

छि: घिन्नता से भर रहा है मन
खिज रहा है इसकी दुर्गन्ध से
साँस भी लेना दुश्वार हुआ है
इस अमानवीय माहौल में .

इंसान नहीं ये भेङिये है
निकल पड़ते है शिकार पे और
नोचते है अपनी ही संस्कृति को
तृप्त करने वासना की प्यास को .

आओं रोंद दे इन्हें अभी की अभी
अपनी पांव की इन जूतियों से
जो आहार समझकर खा रहे है
निरंतर नारी के वजूद को.

Monday, 26 November 2012

कसम

कसम दे दी इन अश्को को न बहना इन आँखों से
मेरे सपनो को यूँ  रो-रो कर ना बहाना तुम
बहुत प्यारे है ये मुझको मेरी आखों के तारे है ,
अपने गम के सागर में इनको न डुबोना तुम
बसे है मेरे पलकों पर बड़े अरमान से सारे ,
अपने दर्द की लहरों से इनको न मिटाना तुम
बड़े सुन्दर है ये सारे मिटाने से है क्या हासिल
अपने अश्को में नहलाके तुम इनको यूँ निखारो तुम
कि जो देखे इन्हें ,बस देखते ही कह दे .
हमे भी इन आँखों का कोई सपना बना लो तुम .
                     

Thursday, 22 November 2012

......रफ़्तार बड़ा















जो बीत गयी सो बात गयी ...ये बात किसी ने खूब कहीं
अब क्या सोचे तू ,पड़ा-पड़ा ..उठ जाग जा अब रात गयी
कर तैयारी आगे की सब परेशानी को छोड़ परे ,वरना
फिर तू ही बोलेगा यार मेरे .. सारी मेहनत बेकार गयी
मन बाँध ले कुछ बनने की , अब तू ठान ले कुछ करने की
देख सूरज की किरणें  कैसे, तेरी राहों में फ़ैल गयी
न बना बहाना कोई अब,नहीं है वक्त कुछ मनमानी की
फिर न पछताना बाद में  कि मेरी उमर तो बीत गयी
 चल कदम बड़ा और चलता जा ,ठोकर को ठोकर से मार भगा
फिर देख इन कदमो में दुनिया ना कैसे  तूने झुका दी 
कर दे अचंभित सबको तू ऐसा कोई जादू कर दे
देखते रह जाये सब कि कैसे किस्मत तेरे बस में हो गयी
मत देर लगा तू भी दौड़ लगा सबको पीछे छोड़ना  है  तो
अपने कदमो की धार बड़ा,रफ़्तार बड़ा वरना .....
दुनिया तुझपे हँसकर बोलेगी जो बीत गयी सो बात गयी.







Saturday, 8 September 2012

चाँदनी.....





यूँ  दूर से ना चाँदनी बरसाया करो ,
                           ऐ चाँद मेरे घर भी आया करो ...
अपने ऊँचे बने उस महल से कभी ,
                             ज़मी पे भी उतर आया करो ....
दूर से खड़े-खड़े यूँ देखना भी क्या ,
                              रूबरू नज़र भी मिलाया करो ,
सितारों के संग यूँ दिल जलाना भी क्या,
                               देखके हमे भी, मुस्कुराया करो ...
इंतज़ार रोज़ रात का कराना भी क्या ,
                                      कभी दिन में भी तुम निकल आया करो .

Thursday, 6 September 2012

माँ

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
आना चाहती हूँ माँ मैं तेरे पास, पर
 
तू ही मुझे कभी बुलाती नहीं
 
इतनी-कितनी दूर है तू मुझसे कि
 
तुझतक मेरी पुकार जाती नहीं
 
कितना तड़पता है दिल मेरा तेरे लिए, पर
 
तू ही दर्द मेरा समझ पाती  नहीं
 
चलती हूँ  धूप में तो जलते है पांव मेरे पर
 
छांव तेरे आंचल कि मुझपे कभी आती नहीं
 
रोते-रोते सो जाती हूँ माँ मैं, पर तू
 
कभी सपनो में भी आके मनाती नहीं
 
फिर भी मुझ को यकीन है कि बुलाएगी इक दिन
 
दिल कि दुआ कभी खाली जाती नहीं
 
    माँ है वो आखिर क्यों ना सुनेगी
 
 उसके सीने में दिल है कोई पत्थर नहीं है .... 
 

    

Saturday, 1 September 2012

सपना


















आ गए दिन ख़ुशी के ये सोचकर
घर-घर में दीप जलाया था
हम भी जीवन में कुछ बन जाएँगे
कुछ ऐसा ही सपना सजाया था .
क्या खबर थी कि सपना टूट जाएगा
ख़ुशी के दीपक की लौ में
हमारा तन जल जाएगा.
ये भी पता न था कि
पढाई से विश्वास इस कदर उठ जाएगा
पहले जात फिर नाम पूछा जाएगा .

दीपक








 
 
 




नहीं चाँद आया तो
                             क्या बात हैं
आज सितारों को रोशन
                              करेंगे  दीये .
ये रात काली कैसे           
                             होगी भला 
हर कोने में जब हैं 
                             दीपक जला.
हैं दीवाली का कहना
                             हमसे यहीं    
हो अँधेरा कही रखो दो 
                              दीपक वहीं .
चाँद आये न आये तुम 
                              ग़म न करो
एक दीपक आस का बस
                              जलाए रखो .
होंगे तारे भी खुश कि
                              अब क्या गिले
एक चाँद के बदले हज़ारों
                               दीपक मिले . 

Tuesday, 28 August 2012

नदियाँ

प्रकृति को ऐसे जिंदा रखती हैं नदियाँ ,
जैसे खून बनकर इनकी रगों में हैं दौड़ती नदियाँ .
जहाँ भी यह जाएँ , खुशहाली लाएँ,
इनसे ही हर हरियाली छाएँ .
इनमे वो ताकत हैं कि हम क्या बताएँ ,
बंजर ज़मीं पर भी फूल खिल जाएँ.
इनके ही दम से खेत-खलिहान लहराएँ
ये हैं तो हम जीवन भर खिल - खिलाएँ
यूँ रखो ख्याल इनका जैसे रखते हो खुदका,
न डालो कचरा , रखो साफ़ -सुधरा .
किसी कमी से कही मुरझा गयी तो,
इसमें नुकसान होगा अपना .
चलो आज अपनी ये दुनिया बचाये,
जिंदा रखना है प्रकृति को अपनी
तो आओ मिलकर सब नदियाँ बचायें l

Monday, 27 August 2012

चाँद

इतने सितारों में, लाखों हज़ारों में
तुम्हे एक तारा ये जाने क्यूँ भा गया
सारे हसीं थे मुझ-से रंगीन थे
मुझमे ही ऐसा क्या पसंद आ गया
तुम चाँद थे वहाँ, थोड़ी सी देर के
बैठे थे सब वहाँ, तुमको ही घेर के
हम दूर से खड़े ये सोचते रहे,
नज़र कही से ये हमपे ही आ पड़े
पर इतने सितारों में हमारी गिनती क्या
ये सोचकर के हम खामोश रह गये
फिर हो गया वही जिसकी चाह थी हमें
तुम पास आ गये, प्यार बनके छू गये
संभले भी ना थे हम, हैरान से खड़े
ये सोचते रह गये आखिर  ये हुआ क्या
तुमने उन सितारों को छोड़ कर के क्यूँ
मेरे अँधेरे को गले लगा लिया........

 

Sunday, 26 August 2012

कैसे तुम...








हमें भी बताओ...कैसे तुम

                                      दिल पे पत्थर रखते हो ?

कैसे तुम!अकेले-अकेले ही

                                       दर्द ये सारा सहते हो ?

आंसू तो भर आते होंगे

                                    तुम्हारे भी आँखों में,

बिना किसी से कहे कुछ

                                    कैसे इन्हें तुम पी जाते हो ?

उफ़ान तो बहुत मचाते होंगे

                                      अरमान तुम्हारे भी सीने में....

कैसे तुम! इन तूफानों में

                                    खुद को यूँ संभाले रहते हो?

इन अनचाही हवाओ में कभी

                                       तुम्हारा भी दम घुटता होगा....

कैसे तुम! अपनी साँसों को

                                     रोक-कर भी ज़िन्दा रहते हो ?

हमें भी सिखाओ! आखिर तुम

                                     इतनी हिम्मत कहाँ से लाते हो...

सब कुछ लुट जाने पर भी

                                     कुछ उम्मीद जगा कर रखते हो!!!

फेरीवाला

 

 
 
 


 

 
 
 
 
 
 
 
 
 
ये लो चाँद-सितारे ले लो
जगमगाती यादों के तारे ले लो
ज़िन्दगी कों हँसकर जीने कों
ये लो रंगीन सहारे ले लो ,
गुज़र रहा था फेरीवाला
एक बंजारा, एक मतवाला
बेच रहा था गली-गली में
जीवन की खुशियों का खज़ाना
मोल भी न लेता वो अलबेला
अनमोल मोती लुटाने वाला .
कोई दुखी था ख़ुशी दे गया
बदले में ले गया आसुओं की माला
किसी घाव कों मलहम दे गया
बदले में ले गया दर्द वो सारा
फिर भी खाली न होता झोला
हर दिन आता वो बंजारा
वो मतवाला, वो अलबेला
और नही कोई वो फेरीवाला
है सबका मालिक ऊपरवाला .