Tuesday, 28 August 2012

नदियाँ

प्रकृति को ऐसे जिंदा रखती हैं नदियाँ ,
जैसे खून बनकर इनकी रगों में हैं दौड़ती नदियाँ .
जहाँ भी यह जाएँ , खुशहाली लाएँ,
इनसे ही हर हरियाली छाएँ .
इनमे वो ताकत हैं कि हम क्या बताएँ ,
बंजर ज़मीं पर भी फूल खिल जाएँ.
इनके ही दम से खेत-खलिहान लहराएँ
ये हैं तो हम जीवन भर खिल - खिलाएँ
यूँ रखो ख्याल इनका जैसे रखते हो खुदका,
न डालो कचरा , रखो साफ़ -सुधरा .
किसी कमी से कही मुरझा गयी तो,
इसमें नुकसान होगा अपना .
चलो आज अपनी ये दुनिया बचाये,
जिंदा रखना है प्रकृति को अपनी
तो आओ मिलकर सब नदियाँ बचायें l

Monday, 27 August 2012

चाँद

इतने सितारों में, लाखों हज़ारों में
तुम्हे एक तारा ये जाने क्यूँ भा गया
सारे हसीं थे मुझ-से रंगीन थे
मुझमे ही ऐसा क्या पसंद आ गया
तुम चाँद थे वहाँ, थोड़ी सी देर के
बैठे थे सब वहाँ, तुमको ही घेर के
हम दूर से खड़े ये सोचते रहे,
नज़र कही से ये हमपे ही आ पड़े
पर इतने सितारों में हमारी गिनती क्या
ये सोचकर के हम खामोश रह गये
फिर हो गया वही जिसकी चाह थी हमें
तुम पास आ गये, प्यार बनके छू गये
संभले भी ना थे हम, हैरान से खड़े
ये सोचते रह गये आखिर  ये हुआ क्या
तुमने उन सितारों को छोड़ कर के क्यूँ
मेरे अँधेरे को गले लगा लिया........

 

Sunday, 26 August 2012

कैसे तुम...








हमें भी बताओ...कैसे तुम

                                      दिल पे पत्थर रखते हो ?

कैसे तुम!अकेले-अकेले ही

                                       दर्द ये सारा सहते हो ?

आंसू तो भर आते होंगे

                                    तुम्हारे भी आँखों में,

बिना किसी से कहे कुछ

                                    कैसे इन्हें तुम पी जाते हो ?

उफ़ान तो बहुत मचाते होंगे

                                      अरमान तुम्हारे भी सीने में....

कैसे तुम! इन तूफानों में

                                    खुद को यूँ संभाले रहते हो?

इन अनचाही हवाओ में कभी

                                       तुम्हारा भी दम घुटता होगा....

कैसे तुम! अपनी साँसों को

                                     रोक-कर भी ज़िन्दा रहते हो ?

हमें भी सिखाओ! आखिर तुम

                                     इतनी हिम्मत कहाँ से लाते हो...

सब कुछ लुट जाने पर भी

                                     कुछ उम्मीद जगा कर रखते हो!!!

फेरीवाला

 

 
 
 


 

 
 
 
 
 
 
 
 
 
ये लो चाँद-सितारे ले लो
जगमगाती यादों के तारे ले लो
ज़िन्दगी कों हँसकर जीने कों
ये लो रंगीन सहारे ले लो ,
गुज़र रहा था फेरीवाला
एक बंजारा, एक मतवाला
बेच रहा था गली-गली में
जीवन की खुशियों का खज़ाना
मोल भी न लेता वो अलबेला
अनमोल मोती लुटाने वाला .
कोई दुखी था ख़ुशी दे गया
बदले में ले गया आसुओं की माला
किसी घाव कों मलहम दे गया
बदले में ले गया दर्द वो सारा
फिर भी खाली न होता झोला
हर दिन आता वो बंजारा
वो मतवाला, वो अलबेला
और नही कोई वो फेरीवाला
है सबका मालिक ऊपरवाला .