जैसे खून बनकर इनकी रगों में हैं दौड़ती नदियाँ .
जहाँ भी यह जाएँ , खुशहाली लाएँ,
इनसे ही हर हरियाली छाएँ .
इनमे वो ताकत हैं कि हम क्या बताएँ ,
बंजर ज़मीं पर भी फूल खिल जाएँ.
इनके ही दम से खेत-खलिहान लहराएँ
ये हैं तो हम जीवन भर खिल - खिलाएँ
यूँ रखो ख्याल इनका जैसे रखते हो खुदका,
न डालो कचरा , रखो साफ़ -सुधरा .
किसी कमी से कही मुरझा गयी तो,
इसमें नुकसान होगा अपना .
चलो आज अपनी ये दुनिया बचाये,
जिंदा रखना है प्रकृति को अपनी
तो आओ मिलकर सब नदियाँ बचायें l

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