Monday, 26 November 2012

कसम

कसम दे दी इन अश्को को न बहना इन आँखों से
मेरे सपनो को यूँ  रो-रो कर ना बहाना तुम
बहुत प्यारे है ये मुझको मेरी आखों के तारे है ,
अपने गम के सागर में इनको न डुबोना तुम
बसे है मेरे पलकों पर बड़े अरमान से सारे ,
अपने दर्द की लहरों से इनको न मिटाना तुम
बड़े सुन्दर है ये सारे मिटाने से है क्या हासिल
अपने अश्को में नहलाके तुम इनको यूँ निखारो तुम
कि जो देखे इन्हें ,बस देखते ही कह दे .
हमे भी इन आँखों का कोई सपना बना लो तुम .
                     

Thursday, 22 November 2012

......रफ़्तार बड़ा















जो बीत गयी सो बात गयी ...ये बात किसी ने खूब कहीं
अब क्या सोचे तू ,पड़ा-पड़ा ..उठ जाग जा अब रात गयी
कर तैयारी आगे की सब परेशानी को छोड़ परे ,वरना
फिर तू ही बोलेगा यार मेरे .. सारी मेहनत बेकार गयी
मन बाँध ले कुछ बनने की , अब तू ठान ले कुछ करने की
देख सूरज की किरणें  कैसे, तेरी राहों में फ़ैल गयी
न बना बहाना कोई अब,नहीं है वक्त कुछ मनमानी की
फिर न पछताना बाद में  कि मेरी उमर तो बीत गयी
 चल कदम बड़ा और चलता जा ,ठोकर को ठोकर से मार भगा
फिर देख इन कदमो में दुनिया ना कैसे  तूने झुका दी 
कर दे अचंभित सबको तू ऐसा कोई जादू कर दे
देखते रह जाये सब कि कैसे किस्मत तेरे बस में हो गयी
मत देर लगा तू भी दौड़ लगा सबको पीछे छोड़ना  है  तो
अपने कदमो की धार बड़ा,रफ़्तार बड़ा वरना .....
दुनिया तुझपे हँसकर बोलेगी जो बीत गयी सो बात गयी.