
यूँ दूर से ना चाँदनी बरसाया करो ,
ऐ चाँद मेरे घर भी आया करो ...
अपने ऊँचे बने उस महल से कभी ,
ज़मी पे भी उतर आया करो ....
दूर से खड़े-खड़े यूँ देखना भी क्या ,
रूबरू नज़र भी मिलाया करो ,
सितारों के संग यूँ दिल जलाना भी क्या,
देखके हमे भी, मुस्कुराया करो ...
इंतज़ार रोज़ रात का कराना भी क्या ,
कभी दिन में भी तुम निकल आया करो .
impressive!! :)
ReplyDeleteGreat
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